जलाशय का गेट टूटा, हाईवे डूबा: रातभर जूझते रहे ग्रामीण, फसल पर खतरा
रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के पास स्थित बिलासपुर जलाशय का एक पुराना गेट शुक्रवार शाम अचानक टूट गया, जिससे लाखों गैलन पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल पड़ा। इस घटना के बाद रायगढ़-खरसिया हाईवे जलमग्न हो गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि शनिवार सुबह पानी का स्तर कम होने पर धीरे-धीरे यातायात बहाल किया गया।
बताया जा रहा है कि जलाशय का गेट पानी के अत्यधिक दबाव को सहन नहीं कर सका और टूट गया। पिछले करीब 19-20 घंटों से पानी लगातार सड़कों पर बह रहा है। भले ही अब जल प्रवाह कुछ कम हुआ है, लेकिन आसपास के गांवों और खेतों पर खतरा अभी भी बना हुआ है।
किसानों की फसल पर मंडराया संकट
जलाशय से निकला पानी यदि इसी तरह फैलता रहा, तो भूपदेवपुर, दर्री, कीरितमाल, कुशवाबहरी और कोंडतराई क्षेत्र के खेतों में घुस सकता है। इससे रबी की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है। किसान अपनी महीनों की मेहनत को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।
बारिश के बीच रातभर डटे रहे ग्रामीण
घटना के दौरान एक ओर जलाशय का पानी सड़कों पर फैल रहा था, तो दूसरी ओर बारिश भी शुरू हो गई। ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए रातभर मोर्चा संभाले रखा। टार्च, फावड़े और अन्य उपकरणों के सहारे ग्रामीणों ने रेत की बोरियां लगाकर पानी के बहाव को नियंत्रित करने और उसे सुरक्षित दिशा में मोड़ने का प्रयास किया।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, वैकल्पिक रास्ता तैयार
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। प्रशिक्षु आईएएस एवं प्रभारी एसडीएम अक्षय जोशी, एसडीएम प्रवीण तिवारी और तहसीलदार संदीप राजपूत मौके पर पहुंचे। भूपदेवपुर थाना प्रभारी संजय नाग और उनकी टीम ने हाईवे पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभाली। अधिकारियों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से सड़क किनारे एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया, जिससे धीरे-धीरे पानी निकासी संभव हो सकी।
जल संसाधन विभाग पर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जलाशय का गेट लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसकी मरम्मत की मांग लगातार की जा रही थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिलहाल डैम में लगभग 17 फीट पानी भरा होने के कारण तत्काल मरम्मत भी मुश्किल बताई जा रही है।
इस घटना ने जहां प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को सामने लाया, वहीं विभागीय लापरवाही पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती किसानों की फसल को बचाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।



